जनजाति महिलाओं की साक्षरता एक अध्ययन

(.. राज्य के संदर्भ में)

 

राजेश शुक्ला1 एवं बी एल सोनेकर2

1उपाचार्य, समाजशास्त्र विभाग, दुर्गा महाविद्यालय, रायपुर

2व्याख्याता, अर्थशास्त्र अध्ययनशाला, पं..शु.वि. रायपुर।

 

 

सारांशरू

साक्षरता किसी भी समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है जिसमंे महिला साक्षरता की भूमिका महत्वपूर्ण होती है किन्तु आज भी जनजाति महिला साक्षरता की दृष्टि से पिछड़े हुए हैं 2001 की जनगणना के अनुसार महिलाओं की साक्षरता 39.3 प्रतिशत है, जबकि पुरूषों का 65 प्रतिशत अर्थात पुरूषों की तुलना में 25.7 प्रतिशत की कमी है। अतः सरकार को इन जनजाति महिलाओं की साक्षरता विकास के लिए अनेक योजनाओं को संचालित करने की आवश्यकता है।

 

 

प्रस्तावनारू

राज्य में अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या 66.16 लाख है जो कि कुल जनसंख्या का 31.76 प्रतिशत है, किन्तु आज भी अधिकांशतः अनुसूचित जनजातियाँ अशिक्षित है। अनुसूचित जनजातियांे की स्थिति अच्छी नहीं है। इस कारण समुदाय में बच्चे शिक्षा के स्थान पर श्रम करते हैं लड़कियों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे स्कूल जाने के स्थान पर श्रम करें, घर के कार्यों में माता की सहायता करें, छोटे भाई-बहनों की देखभाल करे तथा रस्सी बनानेे कार्य में सहायता करें।

 

शिक्षा के प्रति जनजातीय लागों की परम्परागत रूढ़िवादी मानसिकता है। महिलाओं की शिक्षा को गैर जरूरी माना जाता है, जिसके कारण वे लड़कियों की शिक्षा आवश्यक नहीं समझते हैं। साथ ही लड़कियों को पराया धन समझने की सोच महिला शिक्षा पर निवेश को आर्थिक तौर पर बोझ मानती है। लड़कियांे पर घरेलु दायित्वों का बोझ, बाल-विवाह, अधिक शिक्षित होने पर अधिक दहेज, शिक्षा के लिए लड़कियों को घर से दूर जाने पर सुरक्षा आदि कई कारण उन्हें पढ़ाने के प्रति अभिभावकों को हतोत्साहित करते हैं।

 

देश के पिछड़े अनुसूचित जनजातियों तथा अल्पसंख्यकों को एक बड़े वर्ग की मानसिकता वर्तमान में भी परम्परावादी है, जो कि इन वर्गों में महिला साक्षरता की राह में एक बड़ा अवरोध है। न्यून शैक्षिक स्तर के कारण ही प्रायः महिलाएँ स्वयं के स्वास्थ्य के प्रति जागरूक नहीं हो पाती और इसी कारण से उनके कल्याण से संबंधित उपलब्ध सुविधाओं को ज्ञान नहीं है। यद्यपि सभी शैक्षिक स्तरों पर लैंगिक असमानता आज भी विद्यमान है, परन्तु स्त्रियों की स्वयं की साक्षरता दर शैक्षिक स्तर में हुई प्रगति को उत्साहजनक माना जा सकता है।

 

वर्तमान में देखा जाता है कि छत्तीसगढ़ की जनजाति महिलाओं में शिक्षा का व्यापक विकास आज भी नहीं हो पाया, अतः जनजाति महिला तो आज भी निरक्षर है।

 

सामान्य स्त्री शिक्षा के अनुपात में अनुसूचित जनजातियों की शिक्षा को देखते हुए अभी भी यह कहा जा सकता है कि स्त्री शिक्षा एक चिन्तनीय विषय है। साक्षरता के वृद्धि होने के साथ जनजातीय शिक्षा की स्थिति बहुत ही असंतोषजनक है। साथ ही आर्थिक आधार पर जनजातियों की सबसे बड़ी समस्या निर्धनता भी है जो उनके पिछड़ेपन का मुख्य कारण होने के साथ ही उनके निम्न आर्थिक स्तर के लिए भी उत्तरदायी है।

 

 

 

 

 

 

निर्धनता के लिए निम्न कारण उत्तरदायी हैं -

कृषि के पिछड़े तरीके

नई वन नीति

कृषि भूमि से पृथकता

दोषपूर्ण व्यवहार, अधिक जन्मदर

विकास योजनाओं का दोषपूर्ण क्रियान्वयन

ऋणग्रस्तता

 

निर्धनता के कारण उचित पौष्टिक आहार का अभाव आवश्यक सुविधाओं की कमी के कारण गंदगी की समस्या, अंधविश्वास और परम्पराओं के कारण शिक्षा के प्रति कम रूझान तथा जनसंख्या का अधिक बढ़ना यह सभी समस्या शिक्षा के अभाव के कारण हैं।

 

उद्देश्य रू

साक्षरता का उद्देश्य जनजाति महिलाओं की साक्षरता स्थिति को जानना एवं जनजाति महिलाओं की साक्षरता दर के साथ तुलना करना एवं साक्षरता विकास के लिए सुझाव देना।

 

शोध प्रविधिरू

प्रस्तुत अध्ययन द्वितीयक आँकड़ों पर आधारित है जिसे सरकार द्वारा प्रतिपादित जनगणना प्रतिवेदन में लिया गया है। साथ ही विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं का अध्ययन कर इस शोध कार्य को पूरा किया गया है।

 

अध्ययन का विश्लेषणरू  

अनुसूचित जाति एवं जनजाति महिलाओं की साक्षरता-2001 की स्थिति में-

 

 

तालिका क्रमांक 1

वर्ग      अनुसूचित जाति महिलाओं की साक्षरता        अनुसूचित जनजाति महिलाओं की साक्षरता

          जनसंख्या         साक्षरता जनसंख्या         साक्षरता

कुल जनसंख्या (साक्षरता)  12,688,89         64.0      28,26,686         52.1

पुरूष     7,80,852 78.7      17,50,602         65.0

महिला   4,88,037 49.2      10,76,084         39.3

स्रोत - ब्मदेने िप्दकपं . 2001

 

 

 

तालिका से ज्ञात होता है कि 2001 की स्थिति में जनजाति महिलाओं की साक्षरता का 39.3 प्रतिशत है जबकि जनजाति महिलाओं साक्षरता दर 39.3 प्रतिशत है जबकि जनजाति महिलाओं का साक्षरता दर 49.2 प्रतिशत है जब हम जनजाति महिलाओं की साक्षरता दर से तुलना करते हैं तब इसमें 9.9 प्रतिशत की कमी पायी गयी जो यह बताना है कि अभी भी जनजाति महिलाओं की साक्षरता दर बहुत कम है अतः इनमें साक्षरता दर में वृद्धि करने के लिए सरकार को शिक्षा से अनेक संबंधित योजनाओं को संचालित करने की जरूरत है ताकि वह जनजाति महिला सामाजिक एवं आर्थिक दृष्टि से देश एवं समाज की मुख्यधारा से जुड़ सके।

 

सुझावरू 

रूढ़िवादिता एवं अन्धविश्वास त्यागकर अपने बच्चों को स्कूल भेजा जाना चाहिए।

स्त्री शिक्षा पर विशेष बल दिया जाना चाहिए।

शिक्षण के माध्यम से परिवर्तन किया जाना चाहिए।

 

शिक्षण संस्थाओं की अपर्याप्तता। जब तक जनजातियों को छात्रावास सुविधाएँ उपलब्ध नहीं करायी जाएगी माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक शालाओं में उनकी उपस्थिति कम होगी। 

 

शिक्षा के प्रति जनजातियों की उदासीनता को दूर किया जाना आवश्यक है।

 

बच्चों को पाठ्य-पुस्तकें, स्कूल यूनिफार्म, छात्रावास सुविधाएँ, पाठ्य सामग्री उपलब्ध करायी जानी चाहिए।

 

महिला साक्षरता के प्रसार में निर्धनता प्रमुख बाधक तत्व है। अध्ययन में आय एवं साक्षरता का धनात्मक संबंध पाया जाना है। इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि वे सभी उपाय जो आदिवासियों के आय एवं रोजगार बढ़ाने के लिए बनाये गये हैं। वे प्रत्यक्ष रूप से साक्षरता को प्रभावित करते हैं। यह आवश्यक है कि इन कार्यक्रमों को अधिक व्यापक बनाया जाये।

 

जनजातियों मंे साक्षरता स्तर में वृद्धि के लिए यह आवश्यक है कि प्रौढ़ शिक्षा कार्यक्रमों के माध्यमों से उनमें साक्षरता बढ़ाई जाये। इसके लिए उन्हंे इस ओर अधिक से अधिक पे्ररित किया जाये। इस कार्य हेतु स्वयं सेवी संस्थाओं की मदद ली जानी चाहिए।

 

संदर्भरू 

1ण्       भारत की जनगणना-2001

2ण्       छत्तीसगढ़ आर्थिक सर्वेक्षण-2009-10

Received on 19.09.2011

Accepted on 06.10.2011

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Research J.  Humanities and Social Sciences. 2(4): Oct. - Dec., 2011, 186-187